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Somvar Vrat Katha के बिना अधूरा है। आपका सोमवार व्रत यहा अभी पढ़े

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नमस्कार दोस्तों somvar vrat katha में यह बताया गया है। कैसे भगवान शिव  अपने भक्तो को आशीर्वाद देते है। समय समय पर उनकी रक्षा करते है। इस व्रत का पालन करने से हम भगवान शिव के करीब महसूस करते हैं।

यह व्रत हमें भगवान शिव की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक होता है। also somvar vrat katha में भी हमे शिव जी की महिमा सुनने को मिलती है।

then इस ब्लॉग में भी आपको सोमवार व्रत विधि अनुसार आपको somvar vrat katha hindi में मिलेगी। 

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Importance of Somvar Vrat Katha  

सोमवार को भगवान शिव की पूजा or व्रत करना हमारे संस्कृति में एक प्राचीन परंपरा है। भगवान शिव की कृपा प्राप्त्ती के लिए somvar vrat katha बहुत जरुरी है।

इस व्रत का विशेष महत्व है और यह विवाहित और अविवाहित दोनों ही व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है। सोमवार व्रत कथा के अनुसार, इस व्रत का पालन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

also इसे विवाहित महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य के लिए भी इस व्रत को करती हैं। संतान कि अगर कोई दिक्कत आ रही है नौकरी-पेशे में दिक्कत है। सोमवार व्रत उनके लिए सही उपाए है। and लड़के भी इन व्रतों को करते हैं तो किसी के लिए कोई मनाही नहीं है 

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Somvar Vrat Katha 

एक समय की बात है अमरपुर नगर में एक अमीर साहूकार रहता था  उसके कोई संतान नहीं थी and जिस कारण वह दुखी रहता था  then संतान प्राप्ति के लिए वह हर सोमवार व्रत कर शिवजी  की पूजा करता था संध्या के समय मंदिर में जाकर भगवान शिव के आगे घी का दीपक जलाता था उसकी भक्ति देख मां  पार्वती प्रसन्न हुईं और उन्होंने भगवान शिव से हुआ थे।

प्राणांत यह आपका सच्चा भक्त है कृपा कर इसकी  इच्छा पूरी करें तब भगवान शिव ने उन्हें समझाया   कि पूर्व जन्म के कर्मों के कारण साहूकार की भाग्य में संतान नहीं है लेकिन माता पार्वती नहीं मानी then तब भगवान शिव ने स्वप्न में उत्साह हुकार को दर्शन दिए और संतान प्राप्ति के वरदान के साथ यह भी बताया कि उसका पुत्र अल्पायु होगा and उसकी आयु मात्र 16 वर्ष  की होगी यह सुनकर वह साहूकार प्रसन्न तो हुआ लेकिन   चिंतित भी हुआ था।

Somvar-Vrat-Katha
Somvar-Vrat-Katha

उसने यह सारी बात अपनी पत्नी को भी  बताई पुत्र के अल्पायु होने की बात जानकर साहूकार ने भी बहुत दुखी हुई है but साहूकार ने अपने सोमवार  के व्रत का नियम नहीं छोड़ा कुछ समय बाद साहूकार के   घर एक पुत्र का जन्म हुआ था then जिसका नाम अमर रखा गया  जब अमर 11 साल का हुआ तो साहूकार ने उसे अपने मामा   दीपचंद के साथ शिक्षा ग्रहण करने का शीघ्र भेज दिया।

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साहूकार ने उन्हें रास्ते के लिए कुछ धन दिया और कहा जहां भी तुम रात्रि विश्राम के लिए रहोगे वहीं यज्ञ  कर ब्राह्मणों को भोजन करवाना यात्रा करते हुए अमर and दीपचंद एक राज्य में पहुंचे जहां की राजकुमारी का  विवाह था but जिस राजकुमार से उसका विवाह हो रहा था वह का नाम था यह बात किसी को पता ना चले इसलिए उस  राह के आपके पिता ने अमर से दूल्हे की जगह बैठने की विनती करी also अमर ने विनती स्वीकार करते हुए राजकुमारी ne चंद्रिका से विवाह कर लिया

लेकिन जब विदाई होने लगी then अमर ने राजकुमारी चंद्रिका को सारी बात बता दी also उन्हें अपने पिता के घर छोड़कर काशी चला गया जब हम अ   16 वर्ष का हुआ था तब उन्होंने एक यज्ञ का आयोजन किया and यज्ञ की समाप्ति पर ब्राह्मणों को भोजन कराया और अन्न और वस्त्र दान किए। उसी रात निद्रा में  अमर की मृत्यु हो गई but अमर के मामा दीपचंद जोर-जोर से विलाप करने लगे उसी समय भगवान शिव और माता  पार्वती वहां से गुजर रहे थे विल आफ की आवाज सुनकर then माता पार्वती ने शिवजी से कहा कि वह उस रोते हुए व्यक्ति का कष्ट दूर कर दें तब भगवान शिव ने कहा यह वही साहूकार का बालक है

also जिसे उन्होंने 16 वर्ष तक  जीवित रहने का वरदान दिया था then माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा हे प्राणनाथ इसका पिता 16 सोमवार का व्रत करते हुए आपको भोग लगाता है also कृपया कर इस के दुखों को दूर करें तब माता पार्वती  की प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने अमर को जीवन का वरदान दिया and वरदान प्राप्त होते ही अमर जीवित हो उठा उसने अपनी शिक्षा पूरी and अपने नगर की ओर वापस लौट गया

Somwar Katha

तब रास्ते में वह नगर आया है जहां अमर का  विवाह हुआ था वहां के राजा and राजकुमारी चंद्रिका ने उन्हें पहचान लिया then राजा ने राजकुमारी चंद्रिका  को अमर के साथ प्रसन्नतापूर्वक विदा किया वहीं दूसरी   ओर साहूकार और साहूकार ने जानते थे कि 16 वर्ष की  आयु में उनके पुत्र की मृत्यु निश्चित थी इस कारण वह   बड़े दुखी थे और कष्ट में अपना जीवन बिता रहे थे तभी  उनका पुत्र अमर राजकुमारी चंद्रिका के साथ घर पहुंचा  

अमर को अपनी नवविवाहित पत्नी के साथ देखकर साहूकार ने बहुत प्रसन्न हुए उसी रात भगवान शिव ने साहूकार के सपने में आकर कहा हे श्रेष्ठी मैंने  तुम्हारे सॉन्ग आपके व्रत से प्रसन्न होकर तुम्हारे  पुत्र को लंबी आयु प्रदान ki है दोस्तों इस प्रकार भाग्य में नहीं लिखे होने के बाद भी सोमवार के व्रत   के प्रभाव से साहूकार को पुत्र सुख की प्राप्ति  हुई।

Somvar Vrat Katha विधि

Somvar-Vrat-Katha-vidhi
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  1. सोमवार के व्रत में पूर्ण उपवास का पालन किया जाता है। also उपवास के दौरान सिर्फ एक बार ही भोजन किया जाता है और उसमें अर्पित किया गया प्रसाद लिया जाता है।
  2. इस दिन भगवान शिव का पूजन विधिवत रूप से किया जाता है। then इसके लिए विशेष पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है।
  3. सोमवार के दिन भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जाता है। also यह मंत्र उनकी कृपा को प्राप्त करने में सहायक होता है।
  4. भगवान शिव की पूजा के बाद पंचामृत से उनका अभिषेक करें। like- जल, दूध, दही, घी, और शहद से अभिषेक किया जाता है। इससे उनकी कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Conclusion-

somvar vrat katha के माध्यम से, हमें जीवन की चुनौतियों पर काबू पाने में में मदद करती है। निर्धारित अनुष्ठान भक्तों को परमात्मा से जुड़ने के लिए एक रोडमैप के रूप में कार्य करता है।

ईमानदारी और भक्ति के साथ सोमवार व्रत कथा का पालन करके, व्यक्ति न केवल प्राचीन परंपरा का सम्मान करते हैं बल्कि अपने जीवन में समृद्धि, खुशी और आंतरिक शांति को भी आमंत्रित करते हैं।

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